How to Worship Nine Mothers in Navratri?

आपको तो पता ही है की हिन्दू धर्म में नवरात्री का कितना महत्व है माँ भगवती इस पुरे संसार की शक्ति का स्रोत है यही धरती की संचालक है इन्ही की कृपा से हमारे सारे कार्य संपन्न होते है हम वर्ष में दो बार नवरात्री मनाते है | आश्विन माह में और दूसरा चैत्र माह में | आश्विन मास की नवरात्री को शारदीय नवरात्री भी कहा जाता है यह सितम्बर या अक्टूबर के माह में पड़ता है | इसे हम खूब धूमधाम से मनाते है शारदीय नवरात्री में भगवान राम की पूजा और रामलीला भी होती है| इन नव दिनों में हम माँ आदिशक्ति की नौ रूपों की की आराधना करते है | और ब्रत भी रखते है यह ब्रत घटस्थापना से शुरू होकर कन्या पूजन पर समाप्त होता है |

शारदीय नवरात्री २०२१ : आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नव दिनों तक माँ जगदम्बा की पूजा अर्चना ब्रत किया जाता है माँ को प्रसन्न रखने के लिए इन नव दिनों में जो भी कुछ दान पुण्य आदि किया जाता है उसका करोड़ो गुना फल मिलता है| और जो भी इस ब्रत को श्रद्दा पूर्बक करता है माँ जगदम्बे उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है | शारदीय नवरात्री में माँ की बड़ी बड़ी झाकिया भी सजती है | यह कलकत्ता ,सुल्तानपुर और बहुत सारे छोटे बड़े शहरो में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है |

इस बार आठ दिनों की है नवरात्री

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्री गुरुवार ७ अक्टूबर २०२१ से प्रारम्भ होकर १४ अक्टूबर २०२१ तक रहेगी| १५ अक्टूबर२०२१ को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जायेगा| इस बार दो तिथियां चतुर्थी और पंचमी एक ही दिन पड़ रही है इसलिए नवरात्री आठ दिन की हो गई है इस बार नवरात्री की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में हो रही है इसलिए इस बार भक्तो को साहस, साधना और संतोष प्राप्त होगा |

घटस्थापना व कलश पूजा : नवरात्री के प्रथम दिन घटस्थापना से ही माँ की पूजन शुरू होता है इस बार ७ अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह ६ बजकर १७ मिनट से सुबह ७ बजकर ७ मिनट तक शुभ फलदायी है |
सुबह सबसे पहले उठ कर घर की साफ सफाई करने के बाद स्नान करे |स्नान करने के बाद पूजा स्थान को गंगा जल से पबित्र कर बैठ जाये |बैठने के बाद मंदिर में डीप प्रज्वलित करे |उसके बाद सबसे पहले मिटटी का एक पात्र ले उसमे मिटटी डालें उसके बाद जौ दाल दे और जल छिड़क दे इसके बाद उस पात्र में कलश रखा जायेगा| कलश को जौ और अक्षत्र रंगकर सजाइये उसमें स्वस्तिक बनाये उसके गले में रोली बांधे |अब कलश को गंगाजल से भरकर उसमे साबुत सुपारी, फूल, दूर्वा, इत्र, पंचरत्न तथा सिक्का डालें| उसके बाद आम के पल्लव (५,७,९,या ११) डालें जो थोड़ा बाहर तक निकला रहे उसके ऊपर मिटटी की परइ रखे, जिसमे साबुत अक्षत्र भर दे |इसके बाद एक नारियल को लाल कपडे में लपेटकर उसपर मौली बांधे उसके बाद कलश के ऊपर रखे जिसका मुँह आपकी तरफ होना चाहिए |अब यह कलश जौ उगाने वाले पात्र में रख दे |और अब सभी देवी देवताओ का आह्वान करते हुए प्रार्थना करे की सभी समस्त देवी देवता आप सभी ९ दिनों तक कलश में विराजमान हो का आह्वान करते हुए कलश की पूजा करे |कलश पर गंगाजल छिड़के, टीका लगाए, अक्षत्र चढ़ाये, फूलमाला अर्पित करे, इत्र छिड़के और नैवेघ चढ़ाकर घटस्थापना करे| कलश को हमेशा माता जी के दायी ओर ही स्थापित करे|

पूजा विधि : घटस्थापना के बाद माँ को चौकी पर स्थापित करे| चौकी उत्तर-पूर्व की ओर होनी चाहिए| चौकी पर लाल वस्त्र बिछाए| वस्त्र बिछाने के बाद माँ दुर्गा को चौकी पर स्थापित करे | माँ अम्बे का गंगाजल से अभिषेक करे| माँ को हल्दी, रोली का टीका और सिंदूर लगाए| माँ को अक्षत्र और पुष्प अर्पित करे| माला पहनाये| धुप-दीप जलाये| नवरात्री ब्रत की कथा पढ़े, दुर्गा सप्तशती का जाप करे | माँ को गुड़-घी का हवन करे इसके बाद दुर्गा चालीसा का पाठ करे उसके बाद माता जी की आरती करे| आरती करने के बाद माँ को सात्विक चीजों का भोग लगाए| इस प्रकार से जो भी माँ की पूजा करता है उस पर माता जी बहुत प्रसन्न होती है और अमोघ फल की प्राप्ति भी होती है |

नवरात्री में नौ माताओ का भोग और वस्त्र : नवरात्रि में कौन सी माता को कौन सा भोग लगाये जिससे वह प्रसन्न हो जाये| और नवरात्रि में नौ दिन कौन से कलर का कपडा पहने आइये जानते है |

माँ का पहला स्वरुप शैलपुत्री : नवरात्री के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है माँ शैलपुत्री को पिले रंग का वस्त्र बहुत पसंद है इसलिए आप सब को पिले रंगो का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ को गाय के घी का भोग लगाना चाहिए इससे आरोग्य लाभ की प्राप्ति होती है और माता जी बहुत प्रसन्न होती है |

माँ का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी: नवरात्री के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है माँ ब्रह्मचारिणी को हरे रंग का वस्त्र बहुत प्रिय है इसलिए आप सब लोगो को नवरात्री के दूसरे दिन हरे रंगो का वस्त्र पहनना चाहिए और शक्कर का भोग लगाना चाहिए ऐसा करने से चिरायु का वरदान प्राप्त होता है |

माँ का तीसरा स्वरुप चंद्रघंटा : माँ का तीसरा स्वरुप चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध है नवरात्री के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है माँ चंद्रघंटा को हल्के भूरे रंग का वस्त्र बहुत पसंद है इसलिए आप लोगो को नवरात्री के तीसरे दिन भूरे रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और दूध का भोग लगाए और जरूरतमंद लोगो दान भी करना चाहिए चाहिए ऐसा करने से ऐश्वर्या की बृद्धि होती है| और माँ भवानी का आशीर्वाद मिलता है |

माँ का चौथा स्वरुप कुष्मांडा: नवरात्री के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है माँ कुष्मांडा को नारंगी रंग का वस्त्र बहुत पसंद है इसलिए आप लोगो को नवरात्री के चौथे दिन नारंगी रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ को मालपुआ का नैवेध अर्पण करना चाहिए ऐसा करने से मनोबल बढ़ता है|

माँ का पांचवा स्वरुप स्कंदमाता: नवरात्री के पाचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है माँ स्कंदमाता को सफ़ेद रंग का वस्त्र बहुत पसंद है इसलिए आप लोगो को नवरात्री के पाचवे दिन सफ़ेद रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ जगतजननी को केले का प्रसाद अर्पण करना चाहिए ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है|

माँ का छठा स्वरुप कात्यायनी : नवरात्री के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है माँ कात्यायनी को लाल रंग का वस्त्र बहुत प्रिय है इसलिए भक्तो को नवरात्री के छठे दिन लाल रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है|

माँ का सातवा स्वरुप कालरात्रि: नवरात्री के सातवे दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है माँ कालरात्रि को नीले रंग का वस्त्र बहुत पसंद है इसलिए आप लोगो को नवरात्री के सातवे दिन नीले रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ कालरात्रि को गुड़ से निर्मित भोग लगाना चाहिए ऐसा करने से शोक से मुक्ति मिलती है|

माँ का आठंवा स्वरुप महागौरी: नवरात्री के आठंवे दिन माँ महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है| इन्होने अपनी तपस्या से गौर वर्ण प्राप्त किया था | माँ महागौरी को गुलाबी रंग का वस्त्र बहुत पसंद है इसलिए आप लोगो को नवरात्री के आठंवे दिन गुलाबी रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ गौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए साथ दान भी करना चाहिए| ऐसा करने से मनुष्य की सभी इच्छाओ की पूर्ति होती है|
माँ का नवा स्वरुप सिद्धिदात्री: नवरात्री के नवे दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है माँ सिद्धिदात्री को जामुनी रंग का वस्त्र बहुत प्रिय है इसलिए भक्तो को नवरात्री के नवे दिन जामुनी रंग का वस्त्र पहनना चाहिए और इस दिन माँ सिद्धिदात्री को चना हलवा का भोग लगाया जाता है साथ में कन्या पूजन भी किया जाता है| ऐसा करने से घर-परिवार में सुख-शांति रहती है और माँ के आशीर्वाद से समृद्धि की प्राप्ति होती है|
नवरात्री में नौ कन्याओ का कन्या पूजन :
नवरात्री में नवमी के दिन 9 कन्याओं का पूजन किया जाता है, एक कन्या को पूजने का मतलब ऐश्वर्य, दो की पूजा करने से भोग और मोक्ष, तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा करने से राज्यपद, पांच से विद्या, छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि, सात कन्याओ को करने से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
कन्याओ को भोजन के पश्चात् दान-दक्षिणा देना अति आवश्यक होता है|ऐसा करने से माँ आदि शक्ति हम पर सदैव प्रसन्न रहती है